तूने पानी में ज्योत जलाई रे लिरिक्स || Tune Pani Mein Jyot Jalaye Re Teri Jai Ho Jwala Mai Re Lyrics

Mata Bhajan

भजन का अर्थयह भजन माँ ज्वाला देवी की महिमा का वर्णन करता है, जो पानी में भी अखंड ज्योति जलाए रखती हैं और 51 शक्तिपीठों में से एक की… पूरा अर्थ पढ़ें →

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भजन के बोल

तूने पानी में ज्योत जगाई रे,

Tune pani men jyot jagai re,

तेरी जय हो ज्वाला माई रे

Teri jay ho jvala mai re

तूने राजा दक्ष के जनम लिया

Tune raja daksh ke janam liya

शिव शंकर के संग ब्याह किया

Shiv shankar ke sang byah kiya

तू तो पार्वती कहलाई रे

Tu to parvati kahlai re

तेरी जय हो ज्वाला माई रे

Teri jay ho jvala mai re

तूने पानी में ज्योत जगाई रे ---- (2)

Tune pani men jyot jagai re ---- (2)

ॐ

तेरे पिता ने यज्ञ रचाया था,

Tere pita ne yagy rachaya tha,

और तुमको नही बुलाया था,

Aur tumko nahi bulaya tha,

तू तो बिना बुलाये चली आयी रे,

Tu to bina bulaye chali ayi re,

तेरी जय हो ज्वाला माई रे

Teri jay ho jvala mai re

तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)

Tune pani men jyot jagai re --- (2)

ॐ

सब देवो का आव्हान हुआ

Sab devo ka avhan hua

शिवशंकर का अपमान हुआ,

Shivashankar ka apman hua,

तू हवन कुंड में समायी रे,

Tu havan kund men samayi re,

तेरी जय हो ज्वाला माई रे,

Teri jay ho jvala mai re,

तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)

Tune pani men jyot jagai re --- (2)

ॐ

शिव शंकर का जब क्रोध बढ़ा

Shiv shankar ka jab krodh badha

भोलेबाबा का जब क्रोध बढ़ा

Bholebaba ka jab krodh badha

कांधे पे सती उठाई रे

Kandhe pe sati uthai re

तेरी जय हो ज्वाला माई रे

Teri jay ho jvala mai re

तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)

Tune pani men jyot jagai re --- (2)

ॐ

मैया जहाँ तुम्हारे अंग पड़े

Maiya jahan tumhare ang pade

मैया वहा वहा तेरे मंदिर बने

Maiya vaha vaha tere mandir bane

तू तो शक्ति पीठ कहलाई रे

Tu to shakti pith kahlai re

तेरी जय हो ज्वाला माई रे

Teri jay ho jvala mai re

तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)

Tune pani men jyot jagai re --- (2)

ॐ

मैया जहा तुम्हारी जीभ गिरी

Maiya jaha tumhari jibh giri

मैया जहा तुम्हारी जीभ गिरी

Maiya jaha tumhari jibh giri

तू तो माँ ज्वाला कहलाई रे

Tu to maa jvala kahlai re

तेरी जय हो ज्वाला माई रे

Teri jay ho jvala mai re

तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)

Tune pani men jyot jagai re --- (2)

ॐ

मैया जहा तुम्हारे नैन गिरे

Maiya jaha tumhare nain gire

मैया जहा तुम्हारे नैन गिरे

Maiya jaha tumhare nain gire

तू तो माँ नैना कहलाई रे

Tu to maa naina kahlai re

तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)

Tune pani men jyot jagai re --- (2)

भजन का अर्थ

यह भजन माँ ज्वाला देवी की महिमा का वर्णन करता है, जो पानी में भी अखंड ज्योति जलाए रखती हैं और 51 शक्तिपीठों में से एक की अधिष्ठात्री देवी हैं।

भजन बताता है कि सती ने राजा दक्ष की पुत्री रूप में जन्म लिया और शिव से विवाह किया, पर पिता के यज्ञ में बिना बुलाए जाने पर वहाँ शिव का अपमान हुआ। क्रोध और अपमान सहन न कर सती हवन कुंड में समा गईं। तब शिव क्रोधित होकर उनके शरीर को कंधे पर उठाकर घूमे, और जहाँ-जहाँ अंग गिरे वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ बने।

भजन के अनुसार जहाँ माता की जीभ गिरी वहाँ वे ज्वाला माई और जहाँ नयन गिरे वहाँ नैना देवी कहलाईं — यह पूरा भजन शक्तिपीठों की उत्पत्ति की मूल कथा को दर्शाता है।

यह भजन कब और क्यों गाया जाता है

यह भजन नवरात्रि, देवी जागरण और ज्वाला माता (ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश स्थित शक्तिपीठ) की पूजा-आरती के समय गाया जाता है।

चूँकि यह भजन सीधे शक्तिपीठों की उत्पत्ति-कथा से जुड़ा है, इसे शक्तिपीठ यात्रा या दर्शन से पहले भी भक्तिभाव जगाने के लिए गाया जाता है।

इससे जुड़ी मान्यता

ज्वाला देवी मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा मुगल बादशाह अकबर के समय की है। नादौन गाँव के परम भक्त ध्यानू, एक हजार यात्रियों के दल सहित ज्वाला माई के दर्शन के लिए जा रहे थे। दिल्ली के चांदनी चौक पर अकबर के सिपाहियों ने इतने बड़े दल को शक की नज़र से रोककर बादशाह के सामने पेश किया।

अकबर के पूछने पर ध्यानू ने बताया कि ज्वाला माता के मंदिर में बिना तेल या ईंधन के अखंड ज्योति सदा जलती रहती है, और माता ही समस्त संसार की पालनहार हैं। अकबर को इस पर विश्वास न हुआ, तो उसने परीक्षा के तौर पर ध्यानू के घोड़े का सिर काट दिया और कहा कि यदि माता में सच में शक्ति है तो वे इसे फिर से जोड़ दें।

ध्यानू माता के दरबार पहुँचे और श्रद्धा से घोड़े के कटे सिर को अर्पित करने का प्रयास किया, पर बात न बनती देख अंततः स्वयं अपना ही शीश काटकर माता को अर्पित कर दिया। इस अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर साक्षात् ज्वाला माता प्रकट हुईं और ध्यानू का सिर पुनः धड़ से जोड़कर उसे जीवित कर दिया, साथ ही घोड़े का सिर भी पूर्ववत जुड़ गया।

इसी घटना के बाद अकबर भी माता की शक्ति के आगे नतमस्तक हो गया, और तभी से ज्वाला देवी की अखंड ज्योति और ध्यानू भगत की भक्ति की यह कथा शक्तिपीठ यात्रा की सबसे प्रचलित कथाओं में गिनी जाती है।

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