"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"

गंगा का किनारा हो,माँ तेरे पर्वत का नजारा हो |Navratri Matarani ke Bhajan lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 20 मार्च 2026
भजन का अर्थ
यह भजन माँ के मंदिर में रोज़ जाकर चरण धोने, दीपक जलाने, हार-चोला चढ़ाने और कीर्तन करने की भक्त की नियमित सेवा-भावना को दर्शाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि में तथा माँ के नियमित दर्शन-पूजन के समय गाया जाता है।
भजन के बोल
गंगा का किनारा हो,माँ तेरे पर्वत का नजारा हो......
Ganga ka kinara ho,maa tere parvat ka najara ho......
रोज रोज मैया तेरे मंदिर में आऊँ
Roj roj maiya tere mandir men aun
मंदिर में आऊँ तेरे चरण घुलाऊँ
Mandir men aun tere charan ghulaun
चरणो का सहारा हो माँ, तेरे पर्वत का ......
Charno ka sahara ho maa, tere parvat ka ......
रोज रोज मैया तेरे मंदिर में आऊँ
Roj roj maiya tere mandir men aun
मंदिर में आऊँ मैया दीपक जलाऊँ
Mandir men aun maiya dipak jalaun
ज्योती का सहारा हो माँ, तेरे पर्वत का......
Jyoti ka sahara ho maa, tere parvat ka......
रोज रोज मैया तेरे मंदिर में आऊँ
Roj roj maiya tere mandir men aun
मंदिर में आऊँ मैया हार चढ़ाऊ
Mandir men aun maiya har chadhau
फूलो का नजारा हो, तेरे पर्वत का......
Phulo ka najara ho, tere parvat ka......
रोज रोज मैया तेरे मंदिर में आऊँ
Roj roj maiya tere mandir men aun
मंदिर में आऊँ मैया चोला चढ़ाऊ
Mandir men aun maiya chola chadhau
चुनरी का सहारा , तेरे पर्वत का......
Chunri ka sahara , tere parvat ka......
रोज रोज मैया तेरे मंदिर में आऊँ
Roj roj maiya tere mandir men aun
मंदिर में आऊँ मैया ,कीर्तन कराऊ
Mandir men aun maiya ,kirtan karau
भक्तो का नजारा हो, तेरे पर्वता नजारा.......
Bhakto ka najara ho, tere parvata najara.......
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए


