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नवरात्रि व्रत कथा | नवम दिन सिद्धिदात्री पूजा | Navratri Vrat Katha 9th day Mata Siddhidatri
धार्मिक कथाएँ
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 5 अक्टूबर 2024
भजन का अर्थ
नवरात्रि के नवें और अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। चार भुजाओं वाली यह देवी कमल पर विराजमान होती हैं और सभी सिद्धियों की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह कथा नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा के समय पढ़ी और सुनाई जाती है, जिससे साधक को ज्ञान, आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
इससे जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि माँ सिद्धिदात्री ने भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा को सभी सिद्धियाँ प्रदान कीं, जिनकी कृपा से ही सृष्टि के निर्माण और संचालन की प्रक्रिया संभव हो सकी।
भजन के बोल
कथा:
Katha:
सिद्धिदात्री देवी ने भगवान विष्णु, शिव, और ब्रह्मा को सभी सिद्धियाँ प्रदान कीं।
Siddhidatri devi ne bhagvan vishnu, shiv, aur brahma ko sabhi siddhiyan pradan kin
उनके आशीर्वाद से ही संसार के निर्माण और संचालन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
Unke ashirvad se hi sansar ke nirman aur sanchalan ki prakriya prarambh hui
महत्व:
Mahatv:
सिद्धिदात्री देवी की पूजा से ज्ञान, आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
Siddhidatri devi ki puja se gyan, atm-sakshatkar aur adhyatmik unnati ki prapti hoti hai
उनकी कृपा से साधक को सभी सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
Unki kripa se sadhak ko sabhi siddhiyan prapt hoti hain
ध्यान मंत्र:
Dhyan mantr:
"सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि।
"Siddhagandharvayakshaghairsurairmarairpi
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥"
Sevyamana sada bhuyat siddhida siddhidayini"
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