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नवरात्रि व्रत कथा | चतुर्थ दिन कूष्मांडा पूजा | Navratri Vrat Katha 4th day Mata Kushmanda
धार्मिक कथाएँ
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 5 अक्टूबर 2024
भजन का अर्थ
नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा होती है, जिनकी आठ भुजाएँ हैं और जो सिंह पर सवार रहती हैं। इन्हें सृष्टिकर्ता देवी माना जाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
कूष्मांडा पूजा से शरीर और मन की शक्ति में वृद्धि होती है तथा आंतरिक ऊर्जा व सकारात्मकता प्राप्त होती है।
इससे जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि जब सृष्टि अंधकार में डूबी थी, तब देवी कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान मात्र से ब्रह्मांड की रचना की। इसी शक्ति के कारण उन्हें "सृष्टिकर्ता" कहा जाता है।
भजन के बोल
कथा:
Katha:
माना जाता है कि देवी कूष्मांडा ने अपने दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, जब सृष्टि अंधकार में थी।
Mana jata hai ki devi kushmanda ne apne divy muskan se brahmand ki rachana ki thi, jab srishti andhakar men thi
उनकी इस शक्ति के कारण उन्हें "सृष्टिकर्ता" कहा जाता है। वे हर जीव में ऊर्जा का संचार करती हैं और जीवन का आधार मानी जाती हैं।
Unki is shakti ke karan unhen "srishtikarta" kaha jata hai ve har jiv men urja ka sanchar karti hain aur jivan ka adhar mani jati hain
पूजा का महत्व:
Puja ka mahatv:
कूष्मांडा देवी की पूजा से शरीर और मन की शक्ति में वृद्धि होती है।
Kushmanda devi ki puja se sharir aur man ki shakti men vriddhi hoti hai
साथ ही यह पूजा आंतरिक ऊर्जा और सकारात्मकता प्रदान करती है।
Sath hi yah puja antrik urja aur sakaratmakta pradan karti hai
ध्यान मंत्र:
Dhyan mantr:
"सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
"Surasampurnaklashan rudhiraplutmev cha
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥"
Dadhana hastapadmabhyan kushmanda shubhadastu me"
"ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः"
"Om devi kushmandayai namah"
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