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पद्मिनी एकादशी padmini ekadashi vrat katha
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पद्मिनी एकादशी padmini ekadashi vrat katha

धार्मिक कथाएँ

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संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम

जोड़ा गया: 17 मई 2026

भजन का अर्थ

पद्मिनी एकादशी की कथा राजा कृतवीर्य और रानी पद्मिनी की है, जिन्हें वर्षों की तपस्या के बाद भी संतान न होने पर माता अनसूया के बताए अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा से महापराक्रमी पुत्र कार्तवीर्य अर्जुन की प्राप्ति हुई।

यह भजन कब और क्यों गाया जाता है

यह व्रत केवल अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के शुक्ल पक्ष में आता है और इसे अत्यंत दुर्लभ व पुण्यदायी माना जाता है, इसलिए भक्त इस विशेष अवसर पर श्रद्धा से व्रत रखते और कथा सुनते हैं।

इससे जुड़ी मान्यता

कथा के अनुसार रानी पद्मिनी ने घोर तपस्या के बावजूद निष्फल रहने पर माता अनसूया के आश्रम में जाकर उपाय पूछा। उनके बताए अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और रानी को तेजस्वी पुत्र कार्तवीर्य अर्जुन का वरदान दिया।

भजन के बोल

🌸 पद्मिनी एकादशी की संपूर्ण कथा 🌸

🌸 Padmini ekadashi ki sampurn katha 🌸

प्राचीन समय में त्रेतायुग में एक धर्मात्मा और पराक्रमी राजा थे, जिनका नाम कृतवीर्य था। वे माहिष्मती नगरी पर राज्य करते थे। राजा अत्यंत प्रतापी, दानी और धर्म का पालन करने वाले थे। उनकी अनेक रानियाँ थीं, परंतु उन्हें संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी।

Prachin samay men tretayug men ek dharmatma aur parakrami raja the, jinka nam kritviry tha ve mahishmati nagri par rajy karte the raja atyant pratapi, dani aur dharm ka palan karne vale the unki anek raniyan thin, parantu unhen santan prapti nahin ho rahi thi

राजा और उनकी मुख्य रानी पद्मिनी इस बात से अत्यंत दुखी रहते थे। पुत्र प्राप्ति के लिए उन्होंने अनेक यज्ञ, दान और धार्मिक कार्य किए, लेकिन उन्हें कोई फल प्राप्त नहीं हुआ।

Raja aur unki mukhy rani padmini is bat se atyant dukhi rahte the putr prapti ke lie unhonne anek yagy, dan aur dharmik kary kie, lekin unhen koi phal prapt nahin hua

अंततः राजा कृतवीर्य ने राजपाट छोड़कर अपनी पत्नी पद्मिनी के साथ वन में जाकर कठोर तपस्या करने का निर्णय लिया। दोनों पति-पत्नी वर्षों तक जंगल में रहकर भगवान विष्णु की आराधना करते रहे। कठोर तपस्या के कारण राजा का शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया, लेकिन फिर भी उन्हें मनचाहा फल प्राप्त नहीं हुआ।

Anttah raja kritviry ne rajpat chhodkar apni patni padmini ke sath van men jakar kathor tapasya karne ka nirnay liya donon pati-patni varshon tak jangal men rahkar bhagvan vishnu ki aradhana karte rahe kathor tapasya ke karan raja ka sharir atyant durbal ho gaya, lekin phir bhi unhen manachaha phal prapt nahin hua

एक दिन रानी पद्मिनी ने महान पतिव्रता स्त्री अनसूया के आश्रम में जाकर उनसे अपनी समस्या बताई और संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। माता अनसूया ने कहा—

Ek din rani padmini ne mahan pativrata stri ansuya ke ashram men jakar unse apni samasya batai aur santan prapti ka upay puchha mata ansuya ne kaha—

“हे पुत्री! तुम अधिक मास के शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करो। भगवान विष्णु की कृपा से तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी।”

“He putri! tum adhik mas ke shukl paksh ki padmini ekadashi ka vidhipurvak vrat karo bhagvan vishnu ki kripa se tumhari manokamna avashy purn hogi”

रानी पद्मिनी ने अत्यंत श्रद्धा और नियमपूर्वक पद्मिनी एकादशी का व्रत किया। उन्होंने रात्रि जागरण किया, भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन किया तथा पूरे मन से पूजा-अर्चना की।

Rani padmini ne atyant shraddha aur niymapurvak padmini ekadashi ka vrat kiya unhonne ratri jagran kiya, bhagvan vishnu ka bhajan-kirtan kiya tatha pure man se puja-archana ki

रानी की सच्ची भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और वरदान माँगने को कहा। तब रानी पद्मिनी ने संतान प्राप्ति की इच्छा व्यक्त की।

Rani ki sachchi bhakti aur shraddha se prasann hokar bhagvan vishnu prakat hue aur vardan mangne ko kaha tab rani padmini ne santan prapti ki ichchha vyakt ki

भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि उन्हें एक अत्यंत तेजस्वी, पराक्रमी और महान पुत्र प्राप्त होगा।

Bhagvan vishnu ne unhen ashirvad dete hue kaha ki unhen ek atyant tejasvi, parakrami aur mahan putr prapt hoga

कुछ समय बाद रानी पद्मिनी ने एक वीर पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम कार्तवीर्य अर्जुन रखा गया। वह आगे चलकर अत्यंत प्रतापी राजा बना और उसने अपने पराक्रम से तीनों लोकों में प्रसिद्धि प्राप्त की।

Kuchh samay bad rani padmini ne ek vir putr ko janm diya, jiska nam kartaviry arjun rakha gaya vah age chalkar atyant pratapi raja bana aur usne apne parakram se tinon lokon men prasiddhi prapt ki

इस प्रकार पद्मिनी एकादशी के प्रभाव से राजा कृतवीर्य और रानी पद्मिनी को संतान सुख प्राप्त हुआ और उनका जीवन सुखमय हो गया।

Is prakar padmini ekadashi ke prabhav se raja kritviry aur rani padmini ko santan sukh prapt hua aur unka jivan sukhamay ho gaya

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