नवरात्रि व्रत कथा | अष्टम दिन महागौरी पूजा | Navratri Vrat Katha 8th day Mata Mahagauri
भजन का अर्थनवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा होती है, जिनका श्वेत वर्ण और उज्ज्वल स्वरूप पवित्रता व शांति का प्रतीक माना… पूरा अर्थ पढ़ें →
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 5 अक्टूबर 2024
भजन के बोल
कथा:
Katha:
महागौरी देवी ने कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था।
Mahagauri devi ne kathor tapasya ki thi, jisse unka sharir kala pad gaya tha
भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें गंगाजल से स्नान कराया, जिससे उनका शरीर उज्ज्वल हो गया और वे महागौरी कहलाईं।
Bhagvan shiv ne unki tapasya se prasann hokar unhen gangajal se snan karaya, jisse unka sharir ujjval ho gaya aur ve mahagauri kahlain
महत्व:
Mahatv:
महागौरी की पूजा से पवित्रता, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
Mahagauri ki puja se pavitrata, mansik shanti aur sukh-samriddhi ki prapti hoti hai
उनका आशीर्वाद जीवन के सभी क्लेशों का अंत करता है।
Unka ashirvad jivan ke sabhi kleshon ka ant karta hai
ध्यान मंत्र:
Dhyan mantr:
"श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
"Shvete vrishe samarudha shvetambaradhara shuchih
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥"
Mahagauri shubhan dadyanmahadevapramodda"
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भजन का अर्थ
नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा होती है, जिनका श्वेत वर्ण और उज्ज्वल स्वरूप पवित्रता व शांति का प्रतीक माना जाता है। वे वृषभ पर सवार होती हैं और चार भुजाओं वाली हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
अष्टमी के दिन कन्या पूजन के साथ माँ महागौरी की आराधना की जाती है, जिससे पवित्रता, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इससे जुड़ी मान्यता
कथा के अनुसार माँ महागौरी ने कठोर तपस्या की थी जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें गंगाजल से स्नान कराया, जिससे उनका वर्ण पुनः उज्ज्वल हो गया और वे महागौरी कहलाईं।
भजन के लिए वाद्ययंत्र
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