नौ दिन मेरे घर आना जगदम्बे मैया Nau Din Mere Ghar Aana Jagdambe Maiya Lyrics
भजन का अर्थयह भजन माँ जगदम्बे को समर्पित है, जिसमें भक्त बड़े प्रेम से मैया को अपने घर नौ दिनों के लिए पधारने का निमंत्रण देता है।… पूरा अर्थ पढ़ें →
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 29 मार्च 2025
भजन के बोल
नौ दिन मेरे घर आना जगदम्बे मैया (2)............
Nau din mere ghar ana jagdambe maiya (2)............
बारह महीने मैया कहीं भी रहना..
Barah mahine maiya kahin bhi rahna..
नौ दिन मेरे घर आना जगदम्बे मैया......
Nau din mere ghar ana jagdambe maiya......
जयपुर से तेरी मैया चुनरी मंगाई (2)............
Jaypur se teri maiya chunri mangai (2)............
चुनरी मंगाई मैया, चुनरी मंगाई.........
Chunri mangai maiya, chunri mangai.........
चुनरी ओढ के जाना जगदम्बे मैया........
Chunri odh ke jana jagdambe maiya........
दिल्ली से मैया तेरा चोला मंगाया (2)............
Dilli se maiya tera chola mangaya (2)............
चोला पहन के जाना जगदम्बे मैया........
Chola pahan ke jana jagdambe maiya........
मुकुट तेरा गुजरात से मंगाया (2)............
Mukut tera gujrat se mangaya (2)............
मुकुट पहन के जाना जगदम्बे मैया........
Mukut pahan ke jana jagdambe maiya........
मुंबई से तेरा श्रृंगार मंगाया (2)............
Mumbi se tera shrringar mangaya (2)............
श्रृंगार करके जाना जगदम्बे मैया........
Shrringar karke jana jagdambe maiya........
घर में छप्पन भोग बनाए (2)............
Ghar men chhappan bhog banae (2)............
भोजन करके जाना जगदम्बे मैया........
Bhojan karke jana jagdambe maiya........
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भजन का अर्थ
यह भजन माँ जगदम्बे को समर्पित है, जिसमें भक्त बड़े प्रेम से मैया को अपने घर नौ दिनों के लिए पधारने का निमंत्रण देता है। इसमें माँ के आगमन की खुशी, श्रद्धा और उनके चरणों में आतिथ्य भाव दिखाई देता है।
भक्त कहता है कि मैया वर्षभर कहीं भी रहें, लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में उसके घर जरूर आएँ। माँ के स्वागत के लिए जयपुर से चुनरी, दिल्ली से चोला, गुजरात से मुकुट और मुंबई से श्रृंगार मंगाने का भाव बताया गया है। अंत में भक्त अपने घर छप्पन भोग तैयार करके मैया को भोजन का भोग लगाने और प्रेमपूर्वक विदा करने की इच्छा व्यक्त करता है। पूरे भजन में माँ को अपने घर बुलाने की आत्मीयता और उनके प्रति प्रेम झलकता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन मुख्य रूप से नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा या जगदम्बा की पूजा के दौरान गाया जाता है।
माता की चौकी, जागरण, घर में होने वाली नवरात्रि पूजा और कन्या पूजन जैसे अवसरों पर भी इसे गाया जा सकता है।
भक्त इसे माँ के घर आगमन की प्रार्थना और उनके स्वागत के भाव से गाते हैं।
भजन में माता के लिए किए गए श्रृंगार और भोग का वर्णन नवरात्रि के उत्सव को और भी भक्तिमय बनाता है।
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