नवरात्रि व्रत कथा | षष्ठम दिन कात्यायनी पूजा | Navratri Vrat Katha 6th day Mata Katyayani

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भजन का अर्थनवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है। सिंह पर सवार यह देवी चार भुजाओं वाली हैं और साहस, शौर्य व आत्मविश्वास… पूरा अर्थ पढ़ें →

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भजन के बोल

कथा:

Katha:

कात्यायनी देवी का जन्म उस समय हुआ जब महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था।

Katyayni devi ka janm us samay hua jab mahishasur ne devtaon ko parajit kar svarg par adhikar kar liya tha

ऋषि कात्यायन ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए घोर तप किया, जिसके फलस्वरूप देवी उनके घर अवतरित हुईं और महिषासुर का वध किया।

Rishi katyayan ne maa durga ko prasann karne ke lie ghor tap kiya, jiske phalasvarup devi unke ghar avtarit huin aur mahishasur ka vadh kiya

ॐ

पूजा का महत्व:

Puja ka mahatv:

कात्यायनी देवी की पूजा से साहस, शौर्य और आत्म-विश्वास की प्राप्ति होती है।

Katyayni devi ki puja se sahas, shaury aur atm-vishvas ki prapti hoti hai

यह पूजा उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो जीवन में साहस और शक्ति की कामना करते हैं।

Yah puja un logon ke lie vishesh rup se mahatvapurn hai jo jivan men sahas aur shakti ki kamna karte hain

ॐ

ध्यान मंत्र:

Dhyan mantr:

चंद्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवरवाहना।

Chandrahasojjavlakra shardulvarvahna

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥"

Katyayni shubhan dadyaddevi danvaghatini"

"ॐ देवी कात्यायन्यै नमः"

"Om devi katyayanyai namah"

भजन का अर्थ

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है। सिंह पर सवार यह देवी चार भुजाओं वाली हैं और साहस, शौर्य व आत्मविश्वास प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।

यह भजन कब और क्यों गाया जाता है

यह कथा छठे दिन विशेषकर उन भक्तों द्वारा सुनी जाती है जो जीवन में साहस और शक्ति की कामना करते हैं।

इससे जुड़ी मान्यता

कथा के अनुसार जब महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब ऋषि कात्यायन ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए घोर तप किया। इसी तप के फलस्वरूप देवी उनके घर कात्यायनी रूप में अवतरित हुईं और महिषासुर का वध किया।

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