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बोली बोली रे कोयलिया हर हर महादेव Boli boli re koyaliya har har mahadev
शिव भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 30 अगस्त 2023
भजन का अर्थ
यह भजन एक कोयल की मधुर बोली के माध्यम से शिव भक्ति के प्रसार को दर्शाता है। कोयल हर-हर महादेव बोलती हुई काशी, हरिद्वार, कैलाश पर्वत जैसे शिव-तीर्थों में गूँजती है, मानो पूरी प्रकृति ही शिव-नाम में लीन हो।
आगे भजन में गोकुल, मथुरा, वृंदावन जैसे कृष्ण-स्थलों का भी उल्लेख है, जिससे यह भाव उभरता है कि शिव और कृष्ण दोनों की महिमा एक साथ पूरे भारत भूमि में गूँजती है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन सावन के महीने और शिवरात्रि पर शिव पूजन में गाया जाता है, विशेषकर जब भक्त काशी विश्वनाथ, हरिद्वार, या कैलाश जैसे तीर्थों की महिमा का स्मरण करते हैं।
भजन-कीर्तन और शिव जागरण में भी इसे सामूहिक उत्साह के साथ गाया जाता है।
भजन के बोल
बोली बोली रे कोयलिया|
Boli boli re koyliya|
हर हर महादेव हर हर महादेव ||
Har har mahadev har har mahadev ||
गौरा रानी के महेश
Gaura rani ke mahesh
बोली बोली रे कोयलिया हर हर महादेव
Boli boli re koyliya har har mahadev
काशी में बोली हरिद्वार में बोली
Kashi men boli haridvar men boli
कैलाश पर्वत पे बोली महादेव
Kailash parvat pe boli mahadev
बोली बोली रे कोयलिया हर हर महादेव
Boli boli re koyliya har har mahadev
गोकुल में बोली मथुरा में बोली
Gokul men boli mathura men boli
वृंदावन में बोली हर हर महादेव
Vrindavan men boli har har mahadev
बोली बोली रे कोयलिया हर हर महादेव
Boli boli re koyliya har har mahadev
केदारनाथ में बोली बद्रीनाथ में बोली
Kedarnath men boli badrinath men boli
अमरनाथ में बोली हर हर महादेव
Amranath men boli har har mahadev
बोली बोली रे कोयलिया हर हर महादेव
Boli boli re koyliya har har mahadev
बागों में बोली बागीचो में बोली
Bagon men boli bagicho men boli
अमुवा की डाली पे बोले हर हर महादेव
Amuva ki dali pe bole har har mahadev
बोली बोली रे कोयलिया हर हर महादेव
Boli boli re koyliya har har mahadev
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