भोले टपके हमारी झोपड़िया, एक महल बना दो बढ़िया | Bhole Tapke Humari Jhopadiya Ek Mehal Bana Do Badhiya Lyrics
भजन का अर्थयह भजन भगवान शिव को समर्पित है। इसमें भक्त भोलेनाथ से प्रेमपूर्वक अपनी छोटी झोपड़ी की परेशानियाँ बताते हुए एक अच्छा और… पूरा अर्थ पढ़ें →
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 15 अगस्त 2026
भजन के बोल
भोले टपके हमारी झोपड़िया,
Bhole tapke hamari jhopdiya,
एक महल बना दो बढ़िया,
Ek mahal bana do badhiya,
कभी जाऊ इस ओर, कभी जाऊ उस ओर,
Kabhi jau is or, kabhi jau us or,
भोले बीच में भीगे मेरी खटिया,
Bhole bich men bhige meri khatiya,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके...
Ek mahal bana do badhiya, bhole tapke...
कैसे भोजन बनाऊ, कैसे तुमको खिलाऊं,
Kaise bhojan banau, kaise tumko khilaun,
कैसे घोटू तुम्हारी भंगिया,
Kaise ghotu tumhari bhangiya,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके...
Ek mahal bana do badhiya, bhole tapke...
यहां ठंडा ठंडा पानी, यहां ठंडी हवा,
Yahan thanda thanda pani, yahan thandi hava,
कैसे बीते हमारी उमरिया,
Kaise bite hamari umriya,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके...
Ek mahal bana do badhiya, bhole tapke...
मैं तो चली जाऊं मायके, चाहे दुनिया अब देखे,
Main to chali jaun mayke, chahe duniya ab dekhe,
मैंने बांध ली सामान की गठरिया,
Mainne bandh li saman ki gathariya,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके....
Ek mahal bana do badhiya, bhole tapke....
मेरा भीगे है चोला, मेरी भीगी है साड़ी,
Mera bhige hai chola, meri bhigi hai sadi,
मेरी भीगी है आधी चुनरिया,
Meri bhigi hai adhi chunriya,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके..
Ek mahal bana do badhiya, bhole tapke..
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भजन का अर्थ
यह भजन किसे समर्पित है और मुख्य भाव क्या है
यह भजन भगवान शिव को समर्पित है। इसमें भक्त भोलेनाथ से प्रेमपूर्वक अपनी छोटी झोपड़ी की परेशानियाँ बताते हुए एक अच्छा और सुरक्षित घर बनाने की विनती करता है।
भजन की पंक्तियों का मतलब
बारिश में झोपड़ी टपकने से भक्त की खटिया और कपड़े भीग जाते हैं।
घर की खराब स्थिति के कारण भोजन बनाने और भोलेनाथ को भोग लगाने में भी परेशानी होती है।
ठंडे पानी और ठंडी हवा के बीच जीवन कठिन होने की बात कही गई है।
परेशान होकर भक्त मायके जाने तक की बात मजाकिया अंदाज में कहता है।
अंत में भोलेनाथ से एक सुंदर और पक्का महल बनाने की प्रेमपूर्ण विनती की गई है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन शिव भक्ति, सत्संग और भजन-कीर्तन के अवसरों पर गाया जाता है।
इसमें भगवान शिव के प्रति अपनापन, सरल भक्ति और घरेलू जीवन की परेशानियों को हल्के-फुल्के अंदाज में व्यक्त किया गया है।
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