जय गणेश जय गणेश देवा आरती | Jai Ganesh Deva Aarti Lyrics in Hindi
भजन का अर्थयह भजन भगवान श्री गणेश को समर्पित है। इसमें गणेश जी के स्वरूप, उनकी करुणा और भक्तों पर कृपा का गुणगान किया गया है।भजन में… पूरा अर्थ पढ़ें →
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 29 मार्च 2024
भजन के बोल
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा |
Jay ganesh, jay ganesh, jay ganesh deva |
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ||
Mata jaki parvati, pita mahadeva ||
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी |
Ekdant, dayavant, char bhujadhari |
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी ||
Mathe sindur sohe, mus ki savari ||
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा |
Pan chadhe, phul chadhe aur chadhe meva |
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ||
Ladduan ka bhog lage, sant karen seva ||
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
Jay ganesh, jay ganesh, jay ganesh, deva
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
Mata jaki parvati, pita mahadeva
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
Andhan ko ankh det, kodhin ko kaya,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
Banjhan ko putr det, nirdhan ko maya
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।
'Sur' shyam sharan ae, saphal kije seva
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
Jay ganesh jay ganesh jay ganesh deva ..
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
Mata jaki parvati, pita mahadeva
बोलो गजानन महाराज की जय 🙏.
Bolo gajanan maharaj ki jay 🙏.
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए
भजन का अर्थ
यह भजन भगवान श्री गणेश को समर्पित है। इसमें गणेश जी के स्वरूप, उनकी करुणा और भक्तों पर कृपा का गुणगान किया गया है।
भजन में गणेश जी से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की गई है।
गणेश जी को माता पार्वती और पिता महादेव का पुत्र, एकदंत और चार भुजाओं वाले देवता बताया गया है।
उनके मस्तक पर सिन्दूर और वाहन के रूप में मूषक का वर्णन किया गया है।
भक्त उन्हें पान, फूल, मेवा और लड्डुओं का भोग अर्पित कर सेवा करते हैं।
भजन में उनकी कृपा से अंधों को दृष्टि, रोगियों को स्वास्थ्य, संतानहीन को पुत्र और निर्धन को धन मिलने की प्रार्थना की गई है।
अंत में भक्त गणेश जी की शरण में आकर अपनी सेवा सफल करने और उनकी कृपा पाने की विनती करता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन गणेश चतुर्थी, गणेश पूजा और गणपति उत्सव के अवसर पर गाया जाता है।
गणेश जी की आरती, पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों में भी इसका गायन किया जाता है।
भक्त इसे गणेश जी की कृपा, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना के रूप में गाते हैं।
वीडियो
भजन के लिए वाद्ययंत्र
इन लिंक से खरीदने पर हमें कमीशन मिल सकता है। As an Amazon Associate I earn from qualifying purchases.





