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Ganesh Chalisa lyrics-श्री गणेश चालीसा ganesh ji ke bhajan-Ganesh chaturthi song
गणेश भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 25 अगस्त 2025
भजन का अर्थ
श्री गणेश चालीसा में गणपति के अद्भुत जन्म, शनि की दृष्टि से उनके शीश के उड़ जाने और हाथी का सिर लगाए जाने की कथा तथा बुद्धि-परीक्षा में माता-पिता की परिक्रमा कर संपूर्ण पृथ्वी-परिक्रमा का पुण्य पाने का वर्णन है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
गणेश चालीसा का पाठ प्रतिदिन तथा विशेषकर बुधवार और गणेश चतुर्थी पर घर में मंगल और सम्मान पाने के लिए किया जाता है।
इससे जुड़ी मान्यता
चालीसा के अनुसार माता पार्वती की तपस्या से गणेश का जन्म हुआ, पर एक बार शनि देव की दृष्टि पड़ने से बालक का सिर धड़ से अलग होकर आकाश में उड़ गया। इसके बाद भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर हाथी का सिर लाए और शिव जी ने उसे बालक के धड़ पर स्थापित कर उन्हें जीवनदान दिया, तभी से वे गजानन कहलाए।
भजन के बोल
॥ दोहा ॥
Doha
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल ।
Jay ganpati sadgun sadan, kavivar badan kripal
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ॥
Vighn haran mangal karan, jay jay girijalal
॥ चौपाई ॥
Chaupai
जय जय जय गणपति गणराजू , मंगल भरण करण शुभः काजू ॥
Jay jay jay ganpati ganraju , mangal bharan karan shubhah kaju
जै गजबदन सदन सुखदाता , विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥
Jai gajbadan sadan sukhadata , vishv vinayka buddhi vidhata
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना , तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥
Vakr tund shuchi shund suhavna , tilak tripund bhal man bhavan
राजत मणि मुक्तन उर माला , स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
Rajat mani muktan ur mala , svarn mukut shir nayan vishala
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं , मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
Pustak pani kuthar trishulan , modak bhog sugandhit phulan
सुन्दर पीताम्बर तन साजित , चरण पादुका मुनि मन राजित ॥
Sundar pitambar tan sajit , charan paduka muni man rajit
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता , गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥
Dhani shiv suvan shadanan bhrata , gauri lalan vishv-vikhyata
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे , मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥
Riddhi-siddhi tav chanvar sudhare , mushak vahan sohat dvare
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी , अति शुची पावन मंगलकारी ॥
Kahau janm shubh katha tumhari , ati shuchi pavan manglakari
एक समय गिरिराज कुमारी , पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥
Ek samay giriraj kumari , putr hetu tap kinha bhari
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा , तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥
Bhayo yagy jab purn anupa , tab pahunchyo tum dhari dvij rupa
अतिथि जानी के गौरी सुखारी , बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥
Atithi jani ke gauri sukhari , bahuvidhi seva kari tumhari
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा , मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
Ati prasann havai tum var dinha , matu putr hit jo tap kinha
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला , बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
Milhi putr tuhi, buddhi vishala , bina garbh dharan yahi kala
गणनायक गुण ज्ञान निधाना , पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
Gannayak gun gyan nidhana , pujit pratham rup bhagvana
अस कही अन्तर्धान रूप हवै , पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥
As kahi antardhan rup havai , palna par balak svarup havai
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना , लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥
Bani shishu rudan jabhin tum thana , lakhi mukh sukh nahin gauri samana
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं , नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥
Sakal magan, sukhamangal gavhin , nabh te suran, suman varshavhin
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं , सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥
Shambhu, uma, bahudan lutavhin , sur munijan, sut dekhan avhin
लखि अति आनन्द मंगल साजा , देखन भी आये शनि राजा ॥
Lakhi ati anand mangal saja , dekhan bhi aye shani raja
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं , बालक, देखन चाहत नाहीं ॥
Nij avgun guni shani man mahin , balak, dekhan chahat nahin
गिरिजा कछु मन भेद बढायो , उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥
Girija kachhu man bhed badhayo , utsav mor, n shani tuhi bhayo
कहत लगे शनि, मन सकुचाई , का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥
Kahat lage shani, man sakuchai , ka karihau, shishu mohi dikhai
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ , शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥
Nahin vishvas, uma ur bhayu , shani son balak dekhan kahyau
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा , बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥
Padtahin shani drig kon prakasha , balak sir udi gayo akasha
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी , सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥
Girija giri vikal havai dharni , so duhkh dasha gayo nahin varni
हाहाकार मच्यौ कैलाशा , शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥
Hahakar machyau kailasha , shani kinhon lakhi sut ko nasha
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो , काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥
Turat garud chadhi vishnu sidhayo , kati chakr so gaj sir laye
बालक के धड़ ऊपर धारयो , प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥
Balak ke dhad upar dharyo , pran mantr padhi shankar daryo
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे , प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥
Nam ganesh shambhu tab kinhe , pratham pujy buddhi nidhi, var dinhe
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा , पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥
Buddhi pariksha jab shiv kinha , prithvi kar pradakshina linha
चले षडानन, भरमि भुलाई , रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥
Chale shadanan, bharmi bhulai , rache baith tum buddhi upai
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें , तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥
Charan matu-pitu ke dhar linhen , tinke sat pradakshin kinhen
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे , नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥
Dhani ganesh kahi shiv hiye harashe , nabh te suran suman bahu barse
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई , शेष सहसमुख सके न गाई ॥
Tumhari mahima buddhi badai , shesh sahsamukh sake n gai
मैं मतिहीन मलीन दुखारी , करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
Main matihin malin dukhari , karhun kaun vidhi vinay tumhari
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा , जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
Bhajat ramsundar prabhudasa , jag prayag, kakra, durvasa
अब प्रभु दया दीना पर कीजै , अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥
Ab prabhu daya dina par kijai , apni shakti bhakti kuchh dijai
॥ दोहा ॥
Doha
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान ।
Shri ganesh yah chalisa, path karai kar dhyan
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ॥
Nit nav mangal grih basai, lahe jagat sanman
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश ।
Sambandh apne sahastr dash, rishi panchami dinesh
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश ॥
Puran chalisa bhayo, mangal murti ganesh
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए



