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पत्थर की मूरत बोल रही क्या मुझे मनाने आया है || Patthar ki murat bol padi kya mujhe manane aya hai Bhajan Lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 10 अप्रैल 2024
भजन का अर्थ
इस अनूठे भजन में मंदिर की मूरत स्वयं भक्त से प्रश्न करती है कि वह छप्पन भोग और लाल चुनरी लेकर मंदिर तो आया, पर क्या उसने कभी अपनी बूढ़ी, भूखी-प्यासी और फटे कपड़ों वाली माँ की सुध ली।
मूरत भक्त को समझाती है कि माता-पिता की सेवा और उन्हें सीने से लगाने में ही सच्ची पूजा छिपी है, क्योंकि माँ-बाप की सेवा में ही साक्षात दुर्गा का वास माना गया है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि, मातृ-पितृ पूजन दिवस और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों में गाया जाता है, जब माता-पिता की सेवा का महत्व समझाना हो।
भजन के बोल
इस नवरात्रि माता रानी का यह सुंदर भजन जरूर सुनें।
Is navratri mata rani ka yah sundar bhajan jarur sunen
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी, क्या मुझे, मनाने आया है ll
Patthar ki, murat bol padi, kya mujhe, manane aya hai ll
तेरे घर में, मैया तड़प रही ll, क्या तुझे, तरस नहीं आया है ,
Tere ghar men, maiya tadap rahi ll, kya tujhe, taras nahin aya hai ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी.........
Patthar ki, murat bol padi.........
तू छप्पन भोग ले आया है, घर में तेरी, मईया भूखी है,
Tu chhappan bhog le aya hai, ghar men teri, maiya bhukhi hai,
दाने दाने को तरस रही है और मुझे खिलाने आया है
Dane dane ko taras rahi hai aur mujhe khilane aya hai
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........
Patthar ki, murat bol padi...........
तू जल का लोटा लाया है,तेरे घर में मैया प्यासी है,
Tu jal ka lota laya hai,tere ghar men maiya pyasi hai,
वो तो बूंद बूंद को तरस रही है और मुझे पिलाने आया है|
Vo to bund bund ko taras rahi hai aur mujhe pilane aya hai|
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............
Patthar ki, murat bol padi............
तेरी माँ के, कपड़े फ़टे हुए, एक साड़ी, तक ना लाया है ll
Teri maa ke, kapde fate hue, ek sadi, tak na laya hai ll
और मुझे, ओढ़ाने को बेटा ll, तूँ लाल, चुनरिया लाया है ,
Aur mujhe, odhane ko beta ll, tun lal, chunriya laya hai ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........
Patthar ki, murat bol padi...........
तेरी एक, झलक को पाने को, कब से तेरी, मईया तरस रही ll
Teri ek, jhalak ko pane ko, kab se teri, maiya taras rahi ll
मेरी एक, झलक ही पाने को ll, तूँ मीलों, चलकर आया है ,
Meri ek, jhalak hi pane ko ll, tun milon, chalkar aya hai ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........
Patthar ki, murat bol padi...........
तूँ अपनी, माँ को मना लेना, सीने से, उसे लगा लेना ll
Tun apni, maa ko mana lena, sine se, use laga lena ll
तेरे सारे, कष्ट ही मिट जाएंगे ll, क्यों मुझे, मनाने आया है ,
Tere sare, kasht hi mit jaenge ll, kyon mujhe, manane aya hai ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............
Patthar ki, murat bol padi............
सुन लो अब, दुनियाँ वालो तुम, अपने मात पिता की, सेवा करो ll
Sun lo ab, duniyan valo tum, apne mat pita ki, seva karo ll
उस में ही, माँ दुर्गा बैठी ll, महाँ माया की, सब माया है ,
Us men hi, maa durga baithi ll, mahan maya ki, sab maya hai ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............
Patthar ki, murat bol padi............
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