कान्हा की सुनके मै आयी, यशोदा मैया देदो बधाई || Krishna janam sun aayi yashoda maiya dede badhai Lyrics
भजन का अर्थयह भजन कृष्ण जन्म की खुशखबरी सुनकर यशोदा मैया से बधाई माँगने का उत्सवपूर्ण दृश्य दर्शाता है। भक्त कहता है कि कान्हा के… पूरा अर्थ पढ़ें →
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 6 सितंबर 2023
भजन के बोल
लल्ला की सुन के मै आयी,
Lalla ki sun ke mai ayi,
यशोदा मैया देदो बधाई,
Yashoda maiya dedo badhai,
कान्हा की सुनके मै आयी,
Kanha ki sunke mai ayi,
यशोदा मैया देदो बधाई,
Yashoda maiya dedo badhai,
लाला जनम सुन आयी,
Lala janam sun ayi,
यशोदा मैया देदो बधाई ।
Yashoda maiya dedo badhai
देदो बधाई मैया देदो बधाई,
Dedo badhai maiya dedo badhai,
लल्ला की सुन के मै आयी,
Lalla ki sun ke mai ayi,
यशोदा मैया देदो बधाई ।
Yashoda maiya dedo badhai
टीका भी लूँगी मैया,
Tika bhi lungi maiya,
बिंदियां भी लूँगी,
Bindiyan bhi lungi,
रेशम की लूँगी रजाई,
Resham ki lungi rajai,
यशोदा मैया देदो बधाई ।
Yashoda maiya dedo badhai
साड़ी भी लूँगी मैया,
Sadi bhi lungi maiya,
लहँगा भी लूँगी,
Lahanga bhi lungi,
धोती भी लूँगी मैया,
Dhoti bhi lungi maiya,
कुर्ता भी लूँगी,
Kurta bhi lungi,
पगडि की होगी चढ़ाई,
Pagdi ki hogi chadhai,
यशोदा मैया देदो बधाई ।
Yashoda maiya dedo badhai
हरवा भी लूँगी मैया,
Harva bhi lungi maiya,
चुड़ि भी लूँगी,
Chudi bhi lungi,
कंगना पे होगी चढ़ाई,
Kangna pe hogi chadhai,
यशोदा मैया देदो बधाई।
Yashoda maiya dedo badhai
लल्ला की सुन के मै आयी,
Lalla ki sun ke mai ayi,
यशोदा मैया देदो बधाई,
Yashoda maiya dedo badhai,
कान्हा की सुनके मै आयी,
Kanha ki sunke mai ayi,
यशोदा मैया देदो बधाई,
Yashoda maiya dedo badhai,
लाला जनम सुन आयी,
Lala janam sun ayi,
यशोदा मैया देदो बधाई ।
Yashoda maiya dedo badhai
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भजन का अर्थ
यह भजन कृष्ण जन्म की खुशखबरी सुनकर यशोदा मैया से बधाई माँगने का उत्सवपूर्ण दृश्य दर्शाता है। भक्त कहता है कि कान्हा के जन्म की सूचना सुनते ही वह दौड़ा चला आया है, यशोदा मैया अब बधाई दें।
यह सरल भजन जन्माष्टमी की उमंग, हर्ष और गोकुलवासियों के उल्लास को शब्दों में पिरोता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन जन्माष्टमी की रात, विशेषकर आधी रात को जब कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाता है, गाया जाता है।
मंदिरों और घरों में झूला-झांकी सजाकर होने वाले जन्माष्टमी उत्सव में भी इसे भक्त बड़े हर्ष के साथ गाते हैं।
इससे जुड़ी मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार मथुरा के अत्याचारी राजा कंस को आकाशवाणी से पता चला था कि देवकी की आठवीं संतान उसका वध करेगी। इस भय से उसने देवकी-वासुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी सात संतानों को एक-एक कर मार डाला।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की आधी रात को जब कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ, तो द्वार स्वयं खुल गए, पहरेदार सो गए और वासुदेव कृष्ण को यमुना पार गोकुल ले गए, जहाँ यशोदा मैया की गोद में वे नंद के पुत्र के रूप में पले-बढ़े। इसी घटना की स्मृति में जन्माष्टमी मनाई जाती है।
भजन के लिए वाद्ययंत्र
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