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सखी री बांके बिहारी से हमारी लड़ गई अंखियाँ | Sakhi Ri Banke Bihari Se Hamari Lad Gayi Ankhiya | कृष्ण भजन लिरिक्स
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 22 अगस्त 2026
भजन का अर्थ
यह भजन श्री बांके बिहारी (श्री कृष्ण) को समर्पित है। इसमें भक्त के मन में कृष्ण की मोहक छवि और प्रेममयी चितवन के कारण उत्पन्न गहरे भक्ति-भाव और कृष्ण-प्रेम का वर्णन है।
[भजन की पंक्तियों का मतलब — हर अंतरे/हिस्से में क्या कहा गया है, 4-6 पंक्तियाँ]
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
भक्त कहता है कि बांके बिहारी से उसकी आँखें मिल गईं, जिसे रोकने का उसने बहुत प्रयास किया, लेकिन अंततः वह कृष्ण के प्रेम में पड़ गया।
कृष्ण की मोहिनी छवि और दृष्टि ऐसी है कि आँखें उनसे हटती ही नहीं हैं।
उनकी चितवन चारों दिशाओं से रस बरसाती हुई भक्त के मन को अपनी ओर खींच लेती है।
कृष्ण की यह छवि मन के मंदिर में मणि की तरह गहराई से बस गई है, जिसे जीवन समाप्त होने पर भी भुलाया नहीं जा सकता।
इससे जुड़ी मान्यता
यह भजन श्री कृष्ण की भक्ति, प्रेम और उनकी मनमोहक छवि का स्मरण करने के लिए गाया जाता है।
इसे कृष्ण जन्माष्टमी, श्री कृष्ण पूजा, मंदिरों में भजन-कीर्तन तथा राधा-कृष्ण के भक्ति आयोजनों में गाया जा सकता है।
इसके अलावा इसे सामान्य रूप से कृष्ण-प्रेम और भक्ति में भी गाया जाता है।
भजन के बोल
सखी री बांके बिहारी से
हमारी लड़ गयी अंखियाँ ।
बचायी थी बहुत लेकिन
निगोड़ी लड़ गयी अखियाँ ॥
Sakhi ri banke bihari se
Hamari lad gayi ankhiyan
Bachayi thi bahut lekin
Nigodi lad gayi akhiyan
ना जाने क्या किया जादू
यह तकती रह गयी अखियाँ ।
चमकती हाय बरछी सी
कलेजे गड़ गयी आखियाँ ॥
Na jane kya kiya jadu
Yah takti rah gayi akhiyan
Chamkati hay barachhi si
Kaleje gad gayi akhiyan
चहू दिश रस भरी चितवन
मेरी आखों में लाते हो ।
कहो कैसे कहाँ जाऊं
यह पीछे पद गयी अखियाँ ॥
Chahu dish ras bhari chitvan
Meri akhon men late ho
Kaho kaise kahan jaun
Yah pichhe pad gayi akhiyan
भले तन से निकले प्राण
मगर यह छवि ना निकलेगी ।
अँधेरे मन के मंदिर में
मणि सी गड़ गयी अखियाँ ॥
Bhale tan se nikle pran
Magar yah chhavi na niklegi
Andhere man ke mandir men
Mani si gad gayi akhiyan
सखी री बांके बिहारी से
हमारी लड़ गयी अंखियाँ ।
बचायी थी बहुत लेकिन
निगोड़ी लड़ गयी अखियाँ ॥
Sakhi ri banke bihari se
Hamari lad gayi ankhiyan
Bachayi thi bahut lekin
Nigodi lad gayi akhiyan
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