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श्री शिव गंगा होली || Kumaoni holi || shiv ganga chali jag taran ko

कुमाऊँनी होली

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संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम

जोड़ा गया: 5 मार्च 2024

भजन का अर्थ

यह गीत गंगा के हरि-चरणों से निकलने और राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से धरती पर उतरने की कथा बताता है।

गंगा शिव जी की जटा में समाकर जगत का उद्धार करने आई, और गणपति, ब्रह्मा, विष्णु सभी उसी गंगा के सान्निध्य में सिद्धि, सृष्टि व पालन के लिए आते हैं - यह गीत गंगा की सर्वव्यापकता दर्शाता है।

यह भजन कब और क्यों गाया जाता है

यह गीत कुमाऊं की बैठकी होली में तथा गंगा दशहरा पर्व पर गाया जाता है, जहाँ गंगा-अवतरण की कथा का स्मरण किया जाता है।

इससे जुड़ी मान्यता

यह गीत राजा भगीरथ की कथा से जुड़ा है, जिन्होंने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए वर्षों कठोर तप कर गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाया था। गंगा के प्रचंड वेग को धारण करने के लिए भगवान शिव ने उसे अपनी जटाओं में समाहित किया, तभी से गंगा शिव की जटा से बहती मानी जाती है।

भजन के बोल

शिव गंग चली जग तारन को, शिवगंग भई जगतारन को

Shiv gang chali jag taran ko, shivgang bhai jagtaran ko

हर गंग चली जग तारन को

Har gang chali jag taran ko

कोई कहै हरि चरणों से निकली

Koi kahai hari charnon se nikli

कोई कहे हरि नामन सौ शिव

Koi kahe hari naman sau shiv

साधु कहे हरि चरणों से निकली

Sadhu kahe hari charnon se nikli

संत कहै हरि नामन सौ शिव गंग चली

Sant kahai hari naman sau shiv gang chali

तपस्या करके भगीरथ लाऐ

Tapasya karke bhagirath laai

तारन को परिवारन को शिव गंग चली

Taran ko parivaran ko shiv gang chali

शिवगंग चली हरिद्वारन को

Shivgang chali haridvaran ko

बाहर बरस में भगीरथ लाए

Bahar baras men bhagirath lae

आकर शिवजी की जटा में बही शिव गंग

Akar shivji ki jata men bahi shiv gang

ऋद्धि सिद्धि लेकर गणपति आए

Riddhi siddhi lekar ganpati ae

जग में सिद्धि करावन को शिव गंग चली

Jag men siddhi karavan ko shiv gang chali

ब्रह्म लोक से ब्रह्मा जी आए

Brahm lok se brahma ji ae

जग में सृष्टि रचावन को शिव गंग चली

Jag men srishti rachavan ko shiv gang chali

पुष्प विमान चढ़ी विष्णु जा आए

Pushp viman chadhi vishnu ja ae

जग तारन, जग पालन को शिव गंग चली .....

Jag taran, jag palan ko shiv gang chali .....

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