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जल कैसे भरूँ जमुना गहरी || Jal kaise bharu jamuna gehri Kumaoni famous holi geet
कुमाऊँनी होली
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 23 मार्च 2024
भजन का अर्थ
यह प्रसिद्ध कुमाऊंनी होली गीत एक नवविवाहिता स्त्री की मीठी दुविधा का वर्णन करता है - खड़े होकर जल भरे तो राजा राम देख लेंगे, बैठकर भरे तो चुनर भीग जाएगी।
धीरे चले तो घर में सास सख्त है, तेज़ चले तो गागर छलक जाएगी - यह हास-परिहास शैली में स्त्री-जीवन की मार्मिकता और सहज संकोच को दर्शाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत उत्तराखंड की बैठकी होली और महिला-संगीत की महफिलों में गाया जाता है, विशेषकर होली के अवसर पर स्त्रियों की टोली द्वारा।
भजन के बोल
प्रसिद्ध कुमाऊंनी होली गीत :-
Prasiddh kumaunni holi git :-
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी।
Jal kaise bharun jamuna gahri
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
Jal kaise bharun jamuna gahri
ठाड़ी भरूँ राजा राम जी देखे,
Thadi bharun raja ram ji dekhe,
ठाड़ी भरूँ राजा राम जी देखे।
Thadi bharun raja ram ji dekhe
बैठी भरूँ भीजे चुनरी…
Baithi bharun bhije chunri…
जल कैसे भरू जमुना गहरी।
Jal kaise bharu jamuna gahri
बैठी भरूँ भीजे चुनरी…
Baithi bharun bhije chunri…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
Jal kaise bharun jamuna gahri,
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
Jal kaise bharun jamuna gahri
धीरे चलूँ घर सास बुरी है,
Dhire chalun ghar sas buri hai,
धीरे चलू घर सास बुरी है।
Dhire chalu ghar sas buri hai
धमकि चलूँ छलके गगरी….
Dhamki chalun chhalke gagri….
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
Jal kaise bharun jamuna gahri,
धमकि चलूँ छलके गगरी….
Dhamki chalun chhalke gagri….
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी।
Jal kaise bharun jamuna gahri
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
Jal kaise bharun jamuna gahri
गोदी पर बालक, सिर पर गागर,
Godi par balak, sir par gagar,
हे गोदी पर बालक, सिर पर गागर।
He godi par balak, sir par gagra
पर्वत से उतरी गोरी…
Parvat se utri gori…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
Jal kaise bharun jamuna gahri,
पर्वत से उतरी गोरी…
Parvat se utri gori…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी
Jal kaise bharun jamuna gahri
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
Jal kaise bharun jamuna gahri
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