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शनि चालीसा Lyrics | Shani Chalisa in Hindi
शनि भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 8 अगस्त 2026
भजन का अर्थ
यह चालीसा भगवान शनिदेव को समर्पित है, जिन्हें हिंदू परंपरा में कर्मफलदाता और न्याय के देवता के रूप में माना जाता है। इसमें शनिदेव के स्वरूप, उनके विभिन्न नामों और उनके प्रभाव का वर्णन किया गया है। मुख्य भाव शनिदेव की स्तुति, कृपा की प्रार्थना और जीवन के कष्टों से राहत की कामना है।
आरंभ में भगवान गणेश और शनिदेव की वंदना करते हुए उनसे भक्तों की रक्षा और कृपा की प्रार्थना की गई है। आगे शनिदेव के स्वरूप, उनके शस्त्रों और उनके विभिन्न नामों का वर्णन मिलता है। चालीसा में राम, रावण, राजा विक्रमादित्य, हरिश्चंद्र, नल, पांडव और अन्य प्रसंगों के माध्यम से शनिदेव की दशा के प्रभाव का वर्णन किया गया है। इसके बाद शनिदेव के विभिन्न वाहनों और उनसे जुड़ी ज्योतिषीय मान्यताओं का उल्लेख आता है। अंत में शनि ग्रह की शांति के लिए पूजा, पीपल को जल अर्पित करने और दीपदान जैसी परंपराओं का वर्णन करते हुए शनिदेव के स्मरण से सुख प्राप्त होने की प्रार्थना की गई है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
शनि चालीसा का पाठ विशेष रूप से शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा और आराधना के समय किया जाता है। इसे शनि मंदिर में, पीपल के वृक्ष के पास या घर में श्रद्धा के साथ पढ़ने की परंपरा है। शनि जयंती और शनैश्चरी अमावस्या जैसे अवसरों पर भी इसका पाठ किया जाता है। भक्त इसे शनिदेव की कृपा प्राप्त करने और शनि से संबंधित कठिनाइयों से राहत की प्रार्थना के लिए पढ़ते हैं।
इससे जुड़ी मान्यता
हिंदू धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं और इसलिए उन्हें कर्मफलदाता तथा न्यायप्रिय देवता माना जाता है। शनि चालीसा के श्रद्धापूर्वक पाठ को शनि की कठिन दशा, साढ़ेसाती या ढैय्या जैसे समय में आध्यात्मिक सहारे और शनिदेव की कृपा की प्रार्थना के रूप में माना जाता है। शनिवार को शनिदेव की पूजा, पीपल को जल अर्पित करने और दीपदान की परंपराएं भी इसी धार्मिक मान्यता से जुड़ी हैं।
भजन के बोल
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल
Jay ganesh girija suvan, mangal karan kripal
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल
Dinan ke dukh dur kari, kijai nath nihal
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज
Jay jay shri shanidev prabhu, sunhu vinay maharaj
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज
Karhu kripa he ravi tanay, rakhahu jan ki laj
जयति जयति शनिदेव दयाला
Jayti jayti shanidev dayala
करत सदा भक्तन प्रतिपाला
Karat sada bhaktan pratipala
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै
Chari bhuja, tanu shyam virajai
माथे रतन मुकुट छबि छाजै
Mathe ratan mukut chhabi chhajai
परम विशाल मनोहर भाला
Param vishal manohar bhala
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला
Tedhi drishti bhrikuti vikrala
कुण्डल श्रवण चमाचम चमकै
Kundal shravan chamacham chamkai
हिय माल मुक्तन मणि दमकै
Hiy mal muktan mani damkai
कर में गदा त्रिशूल कुठारा
Kar men gada trishul kuthara
पल बिच करैं अरिहिं संहारा
Pal bich karain arihin sanhara
पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन
Pingal, krishno, chhaya nandan
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन
Yam, konasth, raudr, dukh bhanjan
सौरी, मन्द, शनि, दश नामा
Sauri, mand, shani, dash nama
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा
Bhanu putr pujhin sab kama
जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं
Ja par prabhu prasann hai jahin
रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं
Rankhun rav karain kshan mahin
पर्वतहू तृण होई निहारत
Parvathu trin hoi niharat
तृणहू को पर्वत करि डारत
Trinhu ko parvat kari darat
राज मिलत वन रामहिं दीन्हो
Raj milat van ramhin dinho
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो
Kaikeihun ki mati hari linhayo
बनहूँ में मृग कपट दिखाई
Banhun men mrig kapat dikhai
मातु जानकी गई चुराई
Matu janki gai churai
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा
Lakhanhin shakti vikal karidara
मचिगा दल में हाहाकारा
Machiga dal men hahakara
रावण की गति मति बौराई
Ravan ki gati mati baurai
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई
Ramachandr son bair badhai
दियो कीट करि कंचन लंका
Diyo kit kari kanchan lanka
बजि बजरंग बीर की डंका
Baji bajrang bir ki danka
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा
Nrip vikram par tuhi pagu dhara
चित्र मयूर निगलि गै हारा
Chitr mayur nigli gai hara
हार नौलखा लाग्यो चोरी
Har naulakha lagyo chori
हाथ पैर डरवायो तोरी
Hath pair darvayo tori
भारी दशा निकृष्ट दिखायो
Bhari dasha nikrisht dikhayo
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो
Telihin ghar kolhu chalvayo
विनय राग दीपक महँ कीन्हों
Vinay rag dipak mahan kinhon
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों
Tab prasann prabhu hvai sukh dinhayon
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी
Harishchandr nrip nari bikani
आपहुं भरे डोम घर पानी
Aphun bhare dom ghar pani
तैसे नल पर दशा सिरानी
Taise nal par dasha sirani
भूंजी-मीन कूद गई पानी
Bhunji-min kud gai pani
श्री शंकरहिं गहयो जब जाई
Shri shankrahin gahyo jab jai
पारवती को सती कराई
Parvati ko sati karai
तनिक विलोकत ही करि रीसा
Tanik vilokat hi kari risa
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा
Nabh udi gayo gaurisut sisa
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी
Pandav par bhai dasha tumhari
बची द्रौपदी होति उघारी
Bachi draupdi hoti ughari
कौरव के भी गति मति मारयो
Kaurav ke bhi gati mati maryo
युद्ध महाभारत करि डारयो
Yuddh mahabharat kari daryo
रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला
Ravi kahan mukh mahan dhari tatkala
लेकर कूदि परयो पाताला
Lekar kudi paryo patala
शेष देव-लखि विनती लाई
Shesh dev-lakhi vinti lai
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई
Ravi ko mukh te diyo chhudai
वाहन प्रभु के सात सुजाना
Vahan prabhu ke sat sujana
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना
Jag diggaj gardabh mrig svana
जम्बुक सिंह आदि नख धारी
Jambuk sinh adi nakh dhari
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी
So phal jyotish kahat pukari
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं
Gaj vahan lakshmi grih avain
हय ते सुख सम्पति उपजावैं
Hay te sukh sampati upjavain
गर्दभ हानि करै बहु काजा।
Gardabh hani karai bahu kaja
सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
Sinh siddhakar raj samaja
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
Jambuk buddhi nasht kar darai
मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
Mrig de kasht pran sanharai
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
Jab avhin prabhu svan savari
चोरी आदि होय डर भारी॥
Chori adi hoy dar bhari
तैसहि चारि चरण यह नामा।
Taishi chari charan yah nama
स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
Svarn lauh chandi aru tama
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।
Lauh charan par jab prabhu avain
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
Dhan jan sampatti nasht karavain
समता ताम्र रजत शुभकारी।
Samta tamr rajat shubhakari
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
Svarn sarv sarv sukh mangal bhari
जो यह शनि चरित्र नित गावै।
Jo yah shani charitr nit gavai
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
Kabhun n dasha nikrisht satavai
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
Adbhut nath dikhavain lila
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
Karain shatru ke nashi bali dhila
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।
Jo pandit suyogy bulvai
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
Vidhivat shani grah shanti karai
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।
Pipal jal shani divas chadhavta
दीप दान दै बहु सुख पावत॥
Dip dan dai bahu sukh pavta
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
Kahat ram sundar prabhu dasa
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥
Shani sumirat sukh hot prakasha
दोहा
Doha
पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
Path shanishchar dev ko, ki hon 'bhakt' taiyar
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥
Karat path chalis din, ho bhavsagar par
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए