कंहवा पे बोलेला कोयलिया | Kahwa Pe Bolela Koyaliya Sohar Geet-Kajri

Sohar Geet

गीत का अर्थयह सोहर गीत भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी को समर्पित है। इसमें कृष्ण जन्म के अवसर पर प्रकृति, ब्रज और गोकुल में छाई खुशी… पूरा अर्थ पढ़ें →

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गीत के बोल

कंहवां पे बोलेला कोयलिया
त कंहवां पे मोर बोले हो
अरें हो कंहवां पे बोलेला सहरसवा
महलीया उठे सोहर हो

Kanhvan pe bolela koyliya
T kanhvan pe mor bole ho
Aren ho kanhvan pe bolela sahrasva
Mahliya uthe sohar ho

❖

वृन्दावन में बोलेला कोयलिया
त मथुरा में मोर बोले हो
अरे हो गोकुल में बोलेला सहरसवा
महलीया उठे सोहर हो

Vrindavan men bolela koyliya
T mathura men mor bole ho
Are ho gokul men bolela sahrasva
Mahliya uthe sohar ho

❖

कहि गोदी जनमे ललनवा
त कहि खुसी मनवा हो
कहिं घर बजेला बंजनवा
महलीया उठे सोहर हो

Kahi godi janme lalnava
T kahi khusi manva ho
Kahin ghar bajela banjnava
Mahliya uthe sohar ho

❖

देवकीं गोदी जनमे ललनवा
त वसुदेव खुशी मनवा हो
अरे हो नन्द घर बजेला बंजनवा
महलीया उठे सोहर हो

Devkin godi janme lalnava
T vasudev khushi manva ho
Are ho nand ghar bajela banjnava
Mahliya uthe sohar ho

गीत का अर्थ

यह सोहर गीत भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी को समर्पित है। इसमें कृष्ण जन्म के अवसर पर प्रकृति, ब्रज और गोकुल में छाई खुशी तथा मंगलमय वातावरण का सुंदर वर्णन किया गया है।

गीत की शुरुआत में पूछा गया है कि कोयल और मोर कहाँ बोल रहे हैं और उनके मधुर स्वर से किस महल में सोहर गूंज रहा है। आगे बताया गया है कि वृंदावन में कोयल और मथुरा में मोर बोल रहे हैं, जबकि गोकुल में मंगल गीतों की ध्वनि सुनाई दे रही है। इसके बाद देवकी की गोद में ललना के जन्म और वसुदेव के खुशी मनाने का वर्णन आता है। अंत में नंद के घर मंगल वाद्य बजने और कृष्ण जन्म की खुशी में सोहर गाए जाने का भाव प्रकट होता है।

यह गीत कब और क्यों गाया जाता है

यह कृष्ण जन्म का सोहर गीत मुख्य रूप से जन्माष्टमी और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर गाया जाता है। सोहर की परंपरा में किसी शुभ जन्म के अवसर पर परिवार और समाज की महिलाएँ मिलकर मंगल गीत गाती हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस गीत को कृष्ण जन्म की खुशी, मंगलकामना और भक्तिभाव व्यक्त करने के लिए गाया जा सकता है। मंदिरों, घरों और कृष्ण जन्मोत्सव से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों में ऐसे सोहर गीत विशेष रूप से भावपूर्ण लगते हैं।

इससे जुड़ी मान्यता

हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में देवकी और वसुदेव के घर हुआ था। जन्म के बाद वसुदेव श्रीकृष्ण को गोकुल ले गए, जहाँ उनका पालन-पोषण नंद बाबा और माता यशोदा के घर हुआ।

इसी कृष्ण जन्म की कथा को इस सोहर गीत में लोकगीत की शैली में प्रस्तुत किया गया है। गीत में मथुरा, वृंदावन और गोकुल का उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी खुशी और मंगल वातावरण का वर्णन किया गया है।

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